Hindi story ( audhari prem khani)
बात उन दिनों की है, जब मैंने कॉलेज में दाख़िला लिया था. मेरा कोई दोस्त नहीं था, इसलिए थोड़ा अकेलापन-सा लगता. फिर धीरे-धीरे आदत-सी हो चली. कक्षा में मेरी सीट खिड़की के पास थी. कई दिनों से मैं गौर कर रही थी कि रोज़ एक साया मेरे पास से गुज़रता, उसकी निगाहें मुझे ही घूर रही होती थीं. पहले तो मुझे उस पर बहुत ग़ुस्सा आया. सोचा, किसी दिन ऐसी ख़बर लूंगी कि होश ठिकाने आ जाएंगे जनाब के. फिर धीरे-धीरे वह मुझे अच्छा लगने लगा. उसका चेहरा बहुत आकर्षक था. जब भी वह मेरे क्लास रूम के पास से गुज़रता मैं बेचैन हो जाती, उसकी आहटों से मेरी धड़कनें तेज़ हो जातीं. अब तो ये रोज़ का सिलसिला हो गया था. वह दिन में कई बार उस जगह से गुज़रता और मैं सबकी नज़रें बचाकर उसे देख लिया करती. कई बार तो आते-जाते हमारा आमना-सामना भी हुआ, परंतु कोई बात नहीं हुई. हर समय एक बेक़रारी-सी रहती. कुछ कहना चाहती, पर कह नहीं पाती थी. शायद यही प्यार था. वे मेरे दोस्तों से मेरे बारे में बातें करते. दोस्तों से ही पता चला कि उन्हें मैं बहुत ख़ूबसूरत लगती हूं और जिस तरह के पहनावे में वे मुझे देखना चाहते थे, उसका ज़िक्र भी कर देते. जब बात मुझ तक पहु...


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